Sunday, April 6, 2014

वक़्त

वक़्त
 
वक़्त से बड़ा कोई गुरु नहीं

वक़्त से अच्छा कोई मरहम नहीं

जो वक़्त समझाता है

वो कभी नहीं भूलता

वक़्त को वक़्त दो

वक़्त सब समझा देगा 
 
 
 

14 comments:

  1. वक्त का हर शैय गुलाम

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    1. आभार पूर्णिमा दुबे जी

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  2. सलाम। बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर आया हूं। व्यस्तताओं और उलझनों में फंसा मन आपकीकविता में इस कदर उलझ गया कि खुद को भूल गया। बहुत ही अच्छी कविता। बधाई।

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    1. हार्दिक आभार संजय जी

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  3. बहुत सही कहा आपने

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (27-04-2014) को ''मन से उभरे जज़्बात (चर्चा मंच-1595)'' पर भी होगी
    --
    आप ज़रूर इस ब्लॉग पे नज़र डालें
    सादर

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