Friday, May 2, 2014

इंसाफ





सीता को घर से निकाला जब

राम पुरूषार्थ कैसे हुये तब

यशोधरा को सोया छोड़ गये जब

बुद्ध भगवान कैसे हुये तब

द्रौपदी का भरी सभा में चीर हरण हुआ जब

पांडव मर्द कहाँ से हुये तब

अहिल्या को धोखे से लूट लिया

इंद्र देवता कैसे हुये तब

शकुंतला को प्यार का वादा कर के भूल गये

दुष्यंत राजा कैसे हुये तब

हर औरत पर ही क्यों ज़ुल्म होता है

अग्नि परीक्षा औरत को ही क्यों देनी पड़ती है

क्या इन सब मर्दो के गुनाह माफ हैं

रावण ने सीता का हरण किया

पर उसे छुआ नही

तब भी उसे सज़ा मिली और हर साल मिलती है

राम,बुद्ध, इंद्र, दुष्यंत क्या सब माफी के काबिल थे

एक को सज़ा बाकियों को माफी

ये कहाँ का इंसाफ है.

8 comments:

  1. ये कहॉ का इंसाफ है....बहोत-खुब

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  2. एक -एक पंक्ति सही है

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  3. बहुत सुंदर प्रश्न उठाती रचना.
    नई पोस्ट : पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन 'OPEN' और 'CLOSE' - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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