Sunday, October 13, 2013

बुराई पर सच्चाई की जीत




    आज कर जगह अपमान हो रहा नारी का 

   क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

    हर घर के हर कोने में कोई न कोई सिसकती नारी है

     क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

     हर जगह बेखौफ घूम रहे रावण हैं

     और मुँह छिपा कर जीती हर नारी है

      क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

     किसी माँ बहन बेटी की इज्ज़त सुरंक्षित नही

      क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है
     

    

    हर घड़ी कही न कही अग्नि परिक्षा देती नारी है

      क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

     कहाँ मरे हैं रावण आज तो राम ही भटका नज़र आता है
    
        क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

      घर में बीवी रोती है और पति डिस्को में नज़र आता है

        क्या यही बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

      क्या गुनाह है नारी जन्म या अपना धर्म निभाना

      जब सीता ने शर्म छेड़ दी तो त्राही त्राही मच जानी है

     फिर न बोलना धर्म के ठेकेदारो कुछ

      अब सीता की राम से परीक्षा लेने की बारी है

     संभल जाओ सब रावणो अब सीता खुद की रखवारी है

    अब न्याय करेगी हर औरत अपना 

    अब हर रावण का संहार सीता के हाथो हो

   यही सच्ची जीत होगी ,

    अब अबला नही सबला है हर नारी

      यही बुराई पर अच्छाई की जीत होगी सच्ची

   अब यही करने की बारी है

9 comments:

  1. बहुत सुंदर और सही

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  2. सच्चाई को समेटे एक बेहतरीन रचना के लिए बधाई

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    1. आभार दुर्गाप्रसाद जी

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  3. नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (15-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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    1. आभार अरूण जी... अवश्य

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