Sunday, September 22, 2013

काश बेटी होती


      इक बिटिया देता अगर भगवान मुझे

     क्या कम हो जाता उसके दरबार में

     सुना था बहु भी बिटिया होती है

     लेकिन ये बाते हैं सिर्फ दिखावे की शायद

     अगर ऐसा होता तो बेटे माँ से जुदा न होते

     और माँ कभी बेटी के लिये न रोती

    अब जो है उसी में खुश रहना है

    किसी को नही कुछ भी कहना है

    अगर किस्मत अच्छी होती तो

    मेरी भी इक बेटी होती

   काश मेरी भी बेटी होती

   जो मेरा दर्द समझती

    परायी हो कर भी मेरी अपनी होती

    काश.........

20 comments:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 25/09/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. आभार कालीपद प्रसाद जी ..... अवश्य

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  3. ये काश मेरे साथ भी है सखी , आंसू आ गए

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    1. आभार उपासना सखी... जानती हूँ ...

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - सोमवार - 23/09/2013 को
    जंगली बेल सी बढती है बेटियां , - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः22 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra





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  5. काश!! मेरी भी इक बिटिया होती ....

    दिल को छू गई आप की रचना ....बहुत मार्मिक

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  6. bahut sundar rachna .............bitiya ki ma hona yani apni prchhai dekhna .........

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    1. आभार संध्या तिवारी जी ...

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  7. पलो का सुख
    हूँ कमाती जहां में
    न दिया खुदा
    ~~
    दुनिया कहे
    ये है पीर पराई
    तू क्या समझे
    ~~
    समय गवां
    तौ हिम्मत जुटाई
    कहने आई
    ~~
    बेटी दिवस की शुभ कामनाएँ

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  8. हृदय स्पर्शी रचना । ये कमी बहुत खलती है ।

    मेरी रचना:- चलो अवध का धाम

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  9. आपके ब्लॉग को यहाँ शामिल किया गया है । जरुर पधारें और फोलो कर उत्साह बढ़ाएं । ब्लॉग"दीप"

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    1. अवश्य प्रदीप जी ...आभार

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  10. अच्छी सच्ची रचना ,सखी। जिसकी कमी है वह तो रहेगी ही ,चाहे बेटा हो या बेटी। टेलर मेड तो कोई भी रिश्ता नहीं होता है ,सभी में कुछ एडजस्टमेंट करनी ही पड़ती है।

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    1. सही कहा रीता सखी... आभार

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