Saturday, June 8, 2013

तो क्या हुआ




सब ने ठुकराया था

तुमने भी ठुकरा दिया तो क्या हुआ

माँ तो सभी की मरती है एक दिन

तुमने अभी से मरा हुआ समझ लिया तो क्या हुआ

बस थोड़ी सी बची है जिंदगी

इसमें भी न मिलोगे तो क्या हुआ

जब अर्थी उठेगी मेरी तो सब होंगे

बस एक कोना खाली रह जायेगा तो क्या हुआ

माँ हूँ बददुआ तो दे नहीं सकती

तुम्हारी करनी पर दुआ ही दे दूंगी तो क्या हुआ

कभी याद अगर आये मेरी तो

कसम है आंसू मत बहाना

इस बद्नीब के लिए मुस्कुरा भी दोगे तो क्या हुआ

जब मेरी उमर में आओगे तब

मेरा दर्द समझ भी जाओगे तो क्या हुआ

दर्द देने वाले भी दर्द समझने लगे अगर तो क्या हुआ

ये दर्द तुम्हे ना मिले कभी

ये दुआ दे दूंगी तो क्या हुआ

14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (09-06-2013) के चर्चा मंच पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  2. मार्मिक दर्द ... एहसास

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    1. आभार एम् वर्मा जी

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  3. जब मेरी उमर में आओगे तब

    मेरा दर्द समझ भी जाओगे तो क्या हुआ

    सच.....तब पश्चाताप के सिवा कुछ हो भी नहीं सकता।

    दिल की बात दिल तक पहुँची। बधाई !

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    1. आभार सुशीला जी

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  4. बहुत सुन्दर भावात्मक प्रभावी प्रस्तुति
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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    1. हार्दिक आभार कालिपद जी

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  5. बहुत ही बेहतरीन और सार्थक प्रस्तुति,आभार।

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    1. आभार राजेंदर जी

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