Tuesday, June 4, 2013

चुगली

चुगली


अरी ओ सुन रही है न

चल आ थोड़ी चुगली करें

कुछ इधर की मै करू

कुछ उधर की तू कर

चल जल्दी आ चुगली करे

मेरा पेट दर्द हो रहा है

जल्दी कर नहीं दर्द बड जायेगा

कुछ ननद की करते हैं

कुछ सास की करते हैं

कुछ देवर की करते हैं

कुछ भौजाई की करते हैं

चल जल्दी आ काम छोड़

पड़ोसन की चुगली सुन ज़रा

उसकी ननद का देवर

तेरी भौजाई कि बहन

सब पीपल के नीचे बैठे हैं

कहीं वो तेरी चुगली तो नहीं कर रहे

चल भाग कर जा

पकड़ कर चुटिया मरोड़ सब की

देख मेरा नाम मत लेना

मुझे तो तेरा ख्याल था

इसलिए तुझे फोन कर के बताया

अब तेरी मर्ज़ी जो चाहे कर

मै तो रखती हु फोन

अभी पड़ोसन के घर भी जाना है

देखू वहां क्या खिचड़ी पक रही है

देख मै तो सब का भला चाहती हु

अब कोई जो मर्ज़ी कहे

बिना चुगली के

खाना ही हज़म नहीं होता

तू भी जल्दी से बताना

उधर की बात

देख मेरा नाम मत लेना

नहीं तो आगे से कभी तुझसे बात नहीं करुँगी

 

6 comments:

  1. Mast likha hai maza aagaya Chugli padhkar.

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    1. आभार लेख नाथ जी

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  2. :-)
    बड़ा सुख है परनिंदा में

    अनु

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