Sunday, June 2, 2013

अधूरा रिश्ता

एहसास


शब्द नहीं हैं मेरे पास

बस कुछ एहसास हैं

जिन्हें तुम कभी भी

समझ नहीं पाओगे

तुम्हे सिर्फ

शब्दों की भाषा

या

नोटों की भाषा समझ आती है

और ये दोनों

मेरे पास नहीं

नोट तो आयेंगे नहीं

मेरे पास

नोटों का और मेरा

छतीस का आंकड़ा है

उम्मीद करती हूँ

शायद कभी मुझे

बोलना आ जाये

वरना अधुरा ही रह जाएगा

हमारा ये टूटा बिखरा

अधूरा रिश्ता

10 comments:

  1. एहसास नहीं समझ पाते नोट की भाषा समझने वाले ... सच की कहा है ... ऐसों के सामने एहसास नहीं खोलने चाहियें ...

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    1. आभार दिगम्बर जी

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  2. वरना.....
    अधूरा ही रह जाएगा
    हमारा...
    ये टूटा......
    और बिखरा....
    अधूरा रिश्ता
    सुन्दर......अप्रतिम


    सादर

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  3. अहसास अपने आप में सशक्त बोल होते हैं जिन्हें दिल के द्वारा सुना जा सकता है!
    सुन्दर चित्रण !!!

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    1. आभार दी पी माथुर जी

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  4. आभार माथर जी

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. वाह . बहुत उम्दा

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    1. आभार मदन मोहन जी

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