Friday, April 19, 2013

बहादुर


बहादर


मै क्यों आई इस दुनिया में


जिसे देखो वोही घूरता है


माँ पापा घर में बंद रखते हैं


... मैं खेल भी नहीं सकती 


बहार निकलते डर लगता है अब


क्या करू ,क्या मर जाऊं


नहीं मै बहादुर बनुगी


मुकाबला करुँगी दरिंदो से
 
 
छुटकारा दिलौंगी सब को इस डर से
 
मै पुलिस में जाउंगी


4 comments:

  1. Bahut achhi poem hei Rama ji. ISME BAHUT SACHAAI HEI.....

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  2. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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    1. हार्दिक आभार मदन मोहन जी ...जरुर

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