Monday, October 29, 2012

रात

चाँद

चाँद आया
संग लाया
कुछ सपने
कुछ तूफ़ान
कुछ मुस्कुराहटें
कुछ उदासियाँ
कुछ यादें
कुछ हकीकते
ऐसा तूफ़ान
ऐसी रात
मुद्दतों के बाद आई
कुछ बेचैनियाँ
कुछ राहते
संग लायी
कितनी लम्बी
कितनी काली
कितनी सूनी
कितनी डरावनी
कितनी अकेली
रात आई
कैसे कटेगी
ऐसी रात
कितनी अजीब
है ये रात 

4 comments:

  1. कुछ सपने,
    कुछ तूफान,
    कितनी काली,
    कितनी सूनी,
    कितनी डरावनी,
    कितनी अकेली,
    रात आई,
    कैसे कटेगी,
    ऐसी रात,
    कितनी अज़ीब
    है ये रात...........बहुत ही भावुक पंक्तियां....पूरी रचना ही संवेदनाओं के धरातल पर आशा का एक प्रस्फुटन. बहुत ही सुन्दर रचना. बधाई.

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    1. सादर आभार ऋतुपर्ण जी

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