Sunday, June 3, 2012

बेवफा

मेरी वफाओं से बेवफा बने तुम

मेरी सदाऐं ही तुम्हें बावफा बनाऐंगी

जितना चाहे रूला लो मुझे

ये आंसू ये आहें मेरी

तुम्हारा दिल भी चीर जाऐंगी

तड़पोगे एक दिन तुम भी मेरे लिये

जब मेरी यादें तुम्हारा चैन उड़ाऐंगी

मैने तो सिवा वफा के कुछ और न मांगा था

तुम इतने तंगदिल निकले

तुम इतना भी दिया न गया

मैने तो जिंदगी सौंप दी थी तुम्हे

तुम इतने लापरवाह निकले

हमें जिंदगी से ही बेदखल कर दिया तुमने

चिंता अपनी नही तुम्हारी है अब भी

जब तुम छोटा सा दिल न संभाल पाए मेरा

खुद को कैसे संभालोगे

दुआ करूंगी तुम्हारे लिये

तुम्हे इतनी समझ आ जाए बस

फरक कर सको अपने और पराए में

इस जालिम दुनिया से खुद को बचा लो तुम

जहां रहो खुश रहो

मेरी हर दुआ में सदा रहोगे तुम

10 comments:

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    1. धन्यवाद उपासना सखी .......दिल से .....

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  2. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
    हमेशा की तरह ये पोस्ट भी बेह्तरीन है

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    1. हार्दिक धन्यवाद संजय जी .......

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  3. बहुत सुंदर..एक शेर याद आ रहा है कि

    हम बावफा थे इसलिए नजरों से गिर गए
    शायद तुम्हें तलाश किसी बेवफा की थी ।।

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    1. आभार महेंद्र जी ....

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    1. बहुत अच्छा लगा तुम्हे देख कर आनंदी ......स्वागत और आभार

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  5. ​ये कुछ अलेहदा सा ख्याल हैं अतिरंजित स्नेह,,, बधाई ​

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