Thursday, May 31, 2012

काले का जमाना



काले का ही  जमाना है 



काले का ही फ़साना है



पहले तो मूह थे काले 



अब तो हैं दिल भी काले



काले से कहाँ भागें अब 



अब तो हैं ईमान भी काले 



दिल भी काले हो गए अब 



छा गए अब बदल भी काले 



गम  न करो इसका कोई 



दुनिया के तो ढंग  है निराले 








4 comments:

  1. बहुत सच कहा है....सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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    1. धन्यवाद कैलाश जी

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    1. हार्दिक धन्यवाद उपासना सखी ......आप जरुर आती हैं और मुझे इंतज़ार रहता है आप का ...

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