Wednesday, July 23, 2014

साथ



साथ हो उम्र भर का
हाथों में हाथ हो 
ये एक दिन की की नही
सदा की बात हो
लाख तूफान आयें
कभी ये साथ न छूटे
दुनिया छूटे तो छूटे
हाथों से कभी हाथ न छूटे

16 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (25.07.2014) को "भाई-भाई का भाईचारा " (चर्चा अंक-1685)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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    1. हार्दिक आभार राजेंदर जी

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  2. अच्छी कामना के साथ सार्थक प्रस्तुति।

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  3. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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    1. हार्दिक आभार कालिपद जी

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  5. शानदार..और कुछ नहीं कहूँगा आज.

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    1. हार्दिक आभार संजय जी

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