Friday, August 17, 2012

अरमानो के बादल

बादल

दिल के बादलों में चमकी

ऐसी बिजलियाँ

सब अरमान जल कर राख हुए

कुछ पता न चला

जिंदगी  के पन्नों के सब अक्षर

ऐसे फैले दिल की बरसातो में

पता न चला कुछ

कब अरमानो पर गिरी

नसीब की बिजलियाँ

कब आशियाँ उजड़ा

कब सब जल कर राख  हुआ 

4 comments:

  1. Replies
    1. आभार उपासना सखी ....

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  2. बहुत पसन्द आया
    बहुत ही सुंदर लिखा है आपने

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