Saturday, July 14, 2012

जिंदगी

जिंदगी

जिंदगी धोखा देती है

मौत वफ़ा निभाती है

तुम तो मेरी जिंदगी हो

फिर तुम से गिला कैसा

जो तुम्हारे हिस्से आया

वो तुमने किया

जो मेरे हिस्से  आया

उसे मै निभाऊंगी   

4 comments:

  1. Bahut hi bhavpurn abhivaykti.....
    Zindagi me kab kise kaha kaise dhokha mil jaaye ye koi nhi jaanta....ek sirf maut hi saath nibhati hai...

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    1. जीती रहो गौरिका बेटी ....आभार

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  2. क्या कहने, बहुत सुंदर
    आपको पढना वाकई सुखद अनुभव है।

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    1. हार्दिक आभार संजय जी

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