Friday, May 25, 2012

तुम आये ...

आज फिर वो ही प्यार नज़र आया मुझे
तुम्हारी इन मतवारी आँखों में

नज़रे मत झुकाओ  अपनी आज
बड़ी मुद्दत के बाद ये नज़र आया मुझे

तुम दूर थे तो जीवन भी सूना हो गया था
तुम आये तो जीवन  में बहार आ गयी फिर से

कोई देख न ले हमारी मुस्कराहट को
आओ छुप जाएँ कहीं पर दोनों

बहुत बेदर्द जहाँ है ये अब जान गयी हूँ
या तो मुझे छिपा लो या तुम खो जाओ मुझ में

ये बगिया है हम दोनों के प्यार की
रौंदी न जाये कहीं लोगो की नजरो से

चलो चाँद पर  बसा ले इस बगिया को
वहां तो कोई नहीं आ पायेगा देखने

खो जायेंगे इक दूसरे में दोनों
फिर कोई नज़र कैसे लगा पायेगा


12 comments:

  1. aaj fir wo hi pyar najar aya tumhari aakhoo me

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    1. धन्यवाद और प्यार अनु

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  2. बहुत सुन्दर सखी .......

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    1. हार्दिक धन्यवाद उपासना सखी

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  3. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रस्सन जी

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  4. वाह !बहुत खूब......लग रहा है बहुत दिनों के बाद प्रियतम से मुलाकात हुई है.....भावनाओं की अच्छी -सच्ची अभिव्यक्ति.

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    1. धन्यवाद रीता जी

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  5. तुम आये तो आया मुझे याद गली में आज चाँद निकला,जाने कितने दिनों के बाद....

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    1. वाह क्या मिलाया है ....रीता सखी

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  6. वो आए तो फिर रमा खुशियाँ सभी समेट
    वह पल अनुपम है सुमन जब प्रियतम से भेंट
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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    1. हार्दिक आभार श्यामल भाई

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