Thursday, November 26, 2015

मेरी खता


 

    तुम्हारे जुल्म सहकर 
तुम्हे ज़ालिम बना दिया
तुम्हारी बेरूखी सहकर
तुम्हे निर्मोही बना दिया
तुम्हारे कुसूर माफ करके
तुम्हे गुनाहगार बना दिया
खता मेरी थी सदा
तुम्हें माफ करने की
फिर तुम्हे क्यों सबने 
सज़ा का हकदार बना दिया

  

3 comments:

  1. अपने दर्द को बखूबी बयान किया है आपने.
    मेरे ब्लॉग पर भी आइए.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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    1. अवश्य... ब्लाग पर आने का आभार

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    2. नितेश जी लिंक किल्क नहीं हो रहा

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