Sunday, March 2, 2014

अकेली


                                         अकेली


बहुत अकेली बहुत उदास

न कोई सपना न कोई आस

जम गया कोहरा अरमानो पर

गिर गई बर्फ सभी सपनो पर

टूट गये सपने , बिखर गई आस

बहुत अकेली बहुत उदास

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना , जिंदगी का भाव यहाँ और भी ख़राब

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  2. bahut sundar likha hai sakhi ...lekin udas na raho main hun naa sath ...:)

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    1. हार्दिक आभार उपासना सखी

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    1. थैंक्स अक्षित बेटे

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  4. सुन्दर शब्द संयोजन / सुन्दर अभिव्यक्ति

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    1. हार्दिक आभार अभी बेटा

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  5. .. ...बहुत सुन्दर शब्द संयोजन

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    1. हार्दिक आभार संजय जी

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