Saturday, May 12, 2012

ओजस्वी

कितना सुकून मिल रहा है तुझे सीने से लगा कर मुझे ,क्या सदा ऐसे ही तुझे गले से लगा कर रख सकुंगी मै,ये दुनिया वाले ये समाज क्या ख़ुशी से स्वीकार लेगा तुझे ,तेरे दादा दादी तो तेरे आने की खबर सुन कर ही नहीं आये ,पापा को भी कोई काम याद आ गया .सब समझती हूँ मै ,अच्छा है अभी तू नहीं समझती ,लड़की होने का कितना मोल चुकाना पड़ता है ,पैदा होने से लेकर मरने तक । हर जगह बेटो को  दे दी जाती है और एक धक्का दे कर बेटी को पीछे कर दिया जाता है ,सब जानती हूँ मै लेकिन तेरे साथ ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी ये मेरा वादा है जानती है मेरे भाई को अछे स्कूल में भेजते थे और मुझे बस नाम के लिए तब भी मेरे अंक उससे हमेशा अच्छे आते थे ,लेकिन तब भी डांट पड़ती थी मुझे कि खुद पर क्यों समय बरबाद करती रहती है भाई को क्यो नही पढ़ाती, मै क्या करती वो क्या मेरी सुनता था कभी, लेकिन तुझे पढ़ाऊंगी इतना कि सब हैरान रह जाऐ , तुझे अपने पैरो पर खड़ा होना है तभी टक्कर ले सकेगी इस दकियानूसी समाज से ,तुझे पैदा करने मे और बाद में तेरे लड़की होने के कारण कितनी बाते सुनी और सही है, अब मेरा मकसद तुझे खूब पढाना है , सब कुछ सिखाऊंगी तुझे  की लड़को को शरम आए और उन लोगों को भी  जिन्होने तुझे लेकर मुझे बाते सुनाई हैं , उन्हे ये साबित करना है कि लड़की किसी भी बात मे कम नही होती, जानती हूँ कि ये लड़ाई कठिन है पर तू भी वादा कर कभी रोएगी नहीऔर मेरी बात को सच कर के दिखाएगी, इतना ओज हो तेरे चेहरे पर की किसी की बुरी नज़र टिक न पाए, तेरा नाम ही ओजस्वी रख देती हूँ
कैसा लगा नाम मेरी ओजस्वी , बस अब जल्दी से बड़ी हो और मेरा सर गर्व से ऊंचा कर...देख मेरा मन नहीं बार तुझसे बातें करके बहुत अकेली हो गयी थी मै अब हम दोनों ढेर सी बातें भी किया करेंगे ,हम माँ बेटी नहीं सहेलियां होंगी दोनों जो एक दुसरे का हर दर्द बाँट लेंगी ,कभी तुझे कोई ताना दे लड़की होने का तो डरना मत मेरी तरह थोक कर मुह बंद करना उसका  और जब तेरी शादी हो अ तब भी ऐसे ही सर उठा कर रहना हाँ गलती हो तो बिना किसी झिझक के क्षमा मांग लेना चाहे सामनेवाला कोई  छोटा बच्चा ही क्यों न हो ,अकड़ना लो लडको का काम है .....लडकियों में विनिमरता होती है लेकिन विनम्रता का मतलब दबना नहीं होता समझी न ...तू इन सब से अलग होगी मै जानती हूँ ,मेरी ओजस्वी के ओज को कोई नहीं रोक पायेगा  

11 comments:

  1. सही शब्द है 'ओजस्विनी' किसी भी बेटी के लिए. अच्छा लिखा है.पर......आप बीती है या जगबीती?????

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  2. aap biti kaise hogi indu sakhi....mere dono bete hain.....lekin ho to yahi raha hai na.....dukh hota hai...

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  3. नाम के लिए इंदु पुरी जी से सहमति जताते हुए एक भावात्मक अभिव्यक्ति हेतु साधुवाद - हाँ एक दो जगह वर्तनी सुधार की जरूरत - यथा - "अब मेरा मकसद तुझे खूब पड़ाना है , सब कुछ सिखाऊंगी तझे की लड़को को शरम आए" -- में - "पढ़ाना" और "कि" - शेष सुन्दर
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com/
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    http://meraayeena.blogspot.com/

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    1. dhanywad galtiyo ki taraf dhayan dilane ka .....shyamal ji

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  4. वाह रमा जी , सोच भी नहीं सकती आपने मेरे मन की बात कैसे उतार दी...सचमे एक बेटी के लिए ऐसी ही भावनाए आएगी मन में

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    1. Hardik dhanywad Praveena sakhi......shayad hamari dil ki baate ek jaisi hain...

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  5. AUR EK JHATKA SUBAH SUBAH, AAGHAT PAHUCHTI HAI MANUSYA DWARA HI KI JATI HI YE , VISWAS NAHI KAR PATA , JHUNJHLA UTHTA HAI MAN !!
    KHANDAN KYUN ITNA, VICHITRATA KI BHI SEEMA HOTI HAI , ITNA VICHITRA, NAHI NAHI YE MANUSYA DWARA KI GAYI KRITI NAHI,
    NARI HI JANANI , JANANI KI SAB, SWANYANG TAT KAHTE , PHIR KYUNKAR AISE ........AFSOS,

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    1. ye samaj ki ek chhoti si tasveer hai ajay ji....

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  6. लड़की किसी भी बात मे कम नही होती,
    अच्छा लिखा है
    सुन्दर......

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    1. Theek kaha Pratap ji aap ne lekin abhi tak koi bhi sache man se ladki ko ladke se aage badta nahi dekh sakta

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  7. Sahi kaha Samaaj ki yahi reet hai.....purush pradhann samaaj jo thahra....lekin ladkiyo ke bina is samaaj ka koi astitav bhi nahi hai....is sachchaai ko koi nhi jhutla sakta....

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