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Tuesday, May 15, 2012

उमंगो की धुंध

उमंगो पर धुंध और
यादो पर कोहरा छा गया
इतनी भी क्या मजबूरी
कि रिशतो में ठंडापन आ गया
कब छटेगी ये दूरीयों की धुंध
कब निकलेगा उम्मीदो का सूरज
इस इंतजार में तो दम भी
निकलने को आ गया
और मत देर लगाओ
और मत इंतजार करवाओ
कहीं उम्मीदे भी ठंडी हो गई तो
अरमान भी मर जाएंगे
फिर लाख निकले सूरज
हम पलट कर नहीं आएंगे
हमारे इंतजार से ही तो तू है
सोच लो अब दम निकला जाता है
उम्मीदो का सूरज अब तक नही आया
चलते हैं तेरी दुनिया से अब
रिशतो का ठंडापन अब निगलने आ गया


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