तुम फौजी हो
मै गृहणी हूँ
तुम सीमा पर हो
मै घर में हूँ
तुम देश की सेवा करते हो
मै घर का काम करती हूँ
तुम गोली खाते हो
मै गाली खाती हूँ
तुम्हारा खून बहता है
मेरे आंसू बहते हैं
तुम्हारे जख्म दिखते है
मेरे जख्म रिस्ते हैं
तुम्हे तमगा मिलता है
मुझे दुत्कार मिलती है
तुम्हारा सम्मान होता है
मेरा अपमान होता है
तुम दुश्मन से लड़ते हो
मै तन्हाइयो से लड़ती हूँ
तुम अपनी सीमा में रहते हो
मै अपनी सीमा में रहती हूँ
तुम निस्वार्थ सेवा करते हो
मै भी निस्वार्थ काम करती हूँ
फिर
तुम में और मुझमे क्या अंतर
फिर
तुम में और मुझमे क्यों अंतर
फिर
मै अब क्या करू
तुम्ही बताओ
तुम्हारी बात सब सुनेगे
मुझे कोई नहीं पूछेगा
जल्दी जवाब देना
कहीं अधूरा न रह जाए
ये भी मेरी तरह
नारी की व्यथा का बहुत सटीक और मर्मस्पर्शी चित्रण...बहुत सुन्दर
ReplyDeleteधन्यवाद कैलाश जी
Deleteबहुत ही सटीक चित्रण है नारी की व्यथा कोई नहीं सुनता है
ReplyDeleteआभार ..... अनामिका
Deleteएक यथार्थ स्थिति का सजीव चित्रण - वाह
ReplyDeleteसहज शब्द में आपने भाव लिखा है ख़ास
ऐसे जब हालात हों सुमन दुखद एहसास
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
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हार्दिक धन्यवाद श्यामल जी
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